बकवास.
बकवास.
हमारे आज के नेताओं का ईमान हैं सिर्फ बकवास,
बकवास से करता देश और जनता का कागजी-विकास।
जनता के संबोधन में दिखता सिर्फ हवा में विकास,
फाइलों में होता हैं चंद धनवानों का असली विकास।
जनता के भलाई के लिए क्यों कर वह प्रयास,
जब सिर्फ नारों से पूरी होती जनता की आस।
जन-कल्याणी नारों से पूरे होती जनता की हवस,
चंद धनवानों के लिए क्यों नेता ना करे काम खास।
आम जनता के पास सिर्फ देने को वोट,
चुनाव में सिर्फ धनवान ही लगाते नोट।
धनवानों के नोट ही बदले जनता के वोट,
फिर जन कल्याण करके क्यों खायें चोट ?
जब बकवास सुनने की जनता में हैं खोट,
खाली बकवास से ही भरता हो जनता का पेट।
उनका विकास करके क्यों बढ़ाएं जनता के नोट,
जब पार्टी को जीतने में करता मदद कॉरपोरेट।
