बिटिया
बिटिया
वक़्त की कुछ ऐसी मेहरबानी हो गई
मेरी प्यारी-सी बिटिया अब सयानी हो गयी
बचपन में करती थी छोटी छोटी बातों पर जो नखरे
आज दूसरों के नखरे उठाने में माहिर हो गई
मेरी प्यारी-सी बिटिया……
रहता था गुस्सा जिसकी नाक पर सदा
आज सबको समझाने के काबिल हो गई
मेरी प्यारी-सी बिटिया…..
ये नहीं खाना वो नहीं खाना की रट लगाए रहती थी सदा
आज चुपचाप सब कुछ खाने को राजी हो गई
मेरी प्यारी-सी बिटिया…..
किसी भी चीज पर हाथ रखते ही वो
खरीदने की जिद करना उसका
मुझे कुछ नहीं चाहिए आज ये कहने के काबिल हो गई
मेरी प्यारी-सी बिटिया……
बीमार होने पर सारा घर सर पर उठा लेती थी जो
आज बीमारी में भी काम करने की आदी हो गई
मेरी प्यारी-सी बिटिया…..
वक़्त ने कब करवट ली पता ही ना चला
पता ही ना चला कब से वो इतनी जिम्मेदार हो गई
मेरी प्यारी-सी बिटिया……
