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Sumit Malhotra

Abstract Action Inspirational


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Sumit Malhotra

Abstract Action Inspirational


बिखरता आशियाँ।

बिखरता आशियाँ।

1 min 237 1 min 237

देखो-देखो कैसे बिखरता आशियाँ मेरा,

बिखरने के बाद जल रहा आशियाँ मेरा।


मरीज़-ए-इश्क़ का नहीं कोई रक्षक मेरा,

इस मर्ज़ की दवा ना लाइलाज़ मर्ज़ मेरा।


ख़ुद किया हाल-बेहाल पूछते है मर्ज़ मेरा,

दावत-ए-इश्क़ से बच ना पाया दिल मेरा।


अब इस दुनिया से दिल उकता गया मेरा,

बेगानों से ना उनसे गिला-शिकवा है मेरा।


जिन्हें अपना समझ के दिल दिया था मेरा,

रब जी संगदिल रिश्ता-ए-दिल तोड़ा मेरा।


बिखरते आशियाँ को देखना ज़रूरी है मेरा,

गुज़ारिश ख़ुदा से तोड़ दे जीवन-बधंन मेरा।


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