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Swati Nehra

Drama Inspirational

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Swati Nehra

Drama Inspirational

बिखरी जिन्दगी

बिखरी जिन्दगी

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सोचा था जिन्दगी के साथ हँसते हँसते चलेंगे,

पीछे मुङ कर देखा तो वो रुक चुकी थीं,,

कोशिश की फिर भी लेकर चलेंगे,

पर वो बिखर चुकी थीं...


कोशिश की बिखरेंं हुये टुकड़े उठाने की,

पर वो ऐसे टूटें कि जख्म दे चुकी थी,

उन जख्मों को पूछा साथ चलोगे,

बोले हमारा तो साथ गहरा हैं,

तुम को कैसे छोङेंगें...


जिंदगी पीछे बहुत पीछे छूट चुकी थी,

जख्म चल रहे थे साथ,

रंग हो चुका था जिनका लाल,

रंग भी धोखा दे गया सोचा प्यार का है...

पर दर्द का रंग था वो लाल !


जी रहे है जख्मों के साथ फिलहाल,

प्यार की चाह में हो गया जिन्दगी का ये हाल...

बिखरी उस जिन्दगी को

फिर भी करेंगे कोशिश जोङने की...

अपने खोये हुए अस्तित्व को खोजने की...


ना डरेंगे उन जख्मों से,

लेकर चलेंगे दर्द साथ में,

होसले हैं इतने बुलंद की

जियेंंगे हर हालात में...!



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