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dr. kamlesh mishra

Inspirational

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dr. kamlesh mishra

Inspirational

बीते पल

बीते पल

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जितनी मैं उलझी थी,

उतनी ही मैं सुलझी थी।

 

जितनी रात अँधेरी थी,

उतना ही सुखद सबेेरा था।


जितने राहों में काँटे थे,

उतने ही फूलोंं का बिछोना था।


जितने गहरे तूूूफाँ थे।

उतने पास किनारे थे।


जितने पीती आँँखें आँसू थी,

उतने भाव निराले थे।


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