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Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

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Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

बहुत हो गया

बहुत हो गया

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आज मैं खुद को जरा खुद से मिलाऊं

बहुत हो गया

अपने ही रंग में अब मैं रम जाऊं 

बहुत हो गया


हौसले पस्त कर दिए मेरे औरों के तीरों ने

अब बुलंद हौसला खुद ही करूं

बहुत हो गया


औरों के इशारों पे खुद को मैने नचाया बहुत

अपने इशारों पर अब मैं नाचूं

बहुत हो गया


है बसाई रंगीनियां ज़माने ने मुझे मोहरा बनाकर

पट्टी आज आंखों से हटाओं 

बहुत हो गया


मोहल्लत न मिली थी कभी खुद को जानने की

नींद से अब खुद को जगाऊं

बहुत हो गया


खोया बहुत कुछ मरे जमीरों की तामीरदारी में

नए कदम, नई मंजिलें पाऊं

बहुत हो गया


दूरियां उनसे रखूं जो न थे मेरे हमकदम कभी

बेहतर है मुसाफिरों से मिलूं

बहुत हो गया


आज होश में आयी हूं सारी जफाएं करके दफन

नई परवाज के लिए पंख झुटाऊं

बहुत हो गया.......


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