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Suresh Koundal

Tragedy


4.7  

Suresh Koundal

Tragedy


भ्रष्टाचार की बीमारी

भ्रष्टाचार की बीमारी

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चर्चा ये आजकल शरेआम है,

भ्रष्टाचार की बीमारी खुलेआम है।


गरीबी और मुफलिसी का आलम ,

रिश्वत लेना ,बन गया फ़ैशन ।


कहीं जमाखोरी ,कहीं मिलावट,

नैतिक मूल्यों में आई गिरावट ।


हर तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला,

जगह जगह हो रहा घोटाला ।


नेता हो या, हो अधिकारी ,

देश लूट रहे,मूल्यों के व्यापारी ।


सत्ताधीश हैं सत्ता में मस्त ,

हर ओर जनता है त्रस्त ।


रक्त चूसक ,दानव अत्याचारी,

मातृभूमि से ,कर रहे गद्दारी ।


भ्रष्टाचार से मुश्किल जीना ,

लूट खसोट कर पीते, मेहनत का पसीना ।


निवाला छीनते ,ये धनवान भिखारी,

समझे न ये ,किसी की लाचारी ।


हर काम का एक ही किस्सा ,

मिल बांट के लेते, अपना हिस्सा ।


यूँ बेच दिया अपना धर्म-ईमान है,

कि देश की इज़्ज़त यूँ नीलाम है ।


चर्चा ये आजकल शरेआम है,

भ्रष्टाचार की बीमारी खुलेआम है।।




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