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Pratima Singh

Tragedy

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Pratima Singh

Tragedy

भ्रम

भ्रम

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मैं मुझसी मुझमें रह गयी

जो तुम्हें मिली बस छाया थी

तुमने उसको बदला जी भर

जो बदली वो बस माया थी

रूह टहलती दूर अर्श पर

संग तेरे बस काया थी।


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