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Bhawana Raizada

Abstract

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Bhawana Raizada

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भ्रम

भ्रम

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तुम मुझे सोचते हो हर पल,

मैं इसी भ्रम में रहूँ तो अच्छा है।


करते हो बात अपनी सहेलियों से,

उनमें आता है मेरा ही नाम सदा,

हर पल नज़रें बचा कर मुझे ही,


देखते हो तुम जिस तरह हमेशा,

बढ़ने लगती है दिल की धड़कन।

मैं इसी भ्रम में रहूँ तो अच्छा है।


तुम अक्सर आते हो सामने मेरे,

कोई न कोई बहाना बना के,

बैठते हो पल दो पल फिर,


चले जाते हो जिद कर के,

बढ़ा दे न घड़ियां इंतज़ार की

मैं इसी भ्रम में रहूँ तो अच्छा है।


तेरे अंचल की खुशबू रहती है,

आस पास ही मेरे सदा,

तेरी खामोशी भी कुछ कहती है,


यूँ इस तरह हम न होंगे जुदा,

अब जीवन भर है साथ रहना।

मैं इसी भ्रम में रहूँ तो अच्छा है।


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