भलाई (गजल)
भलाई (गजल)
नफरतें मत फैला जिंदगी में, पाठ भलाई का सब को पढ़ाता चल।
देता हो दर्द हर पल जो काँटे की तरह चुभ कर,
बन कर फूल की तरह कोमल, हर पल मुस्कराता चल।
दुख, दर्द में जिसके बह रहे हों आँसू,
उसे सुख पहुँचा कर हँसाता चल।
कर रखा हो कैद अगर उड़ते
पंछी को पिंजरे में अगर
निकाल कर उसे आजाद
करता चल।
दिन ढलने पर अँधेरा महसूस न हो राहगिर को अगर,
दीप जला कर अँधेरा दूर भगाता चल।
मुस्कराहट अगर नहीं दे सकते किसी को,
दुख दे कर दिल किसी का मत दुखाया कर।
ऱखता जो हर बात छुपा कर तुझसे सुदर्शन,
राज अपना भी न उसे बताया कर।
