"भीमराव की सीख"
"भीमराव की सीख"
कविता
"भीमराव की सीख"
पढ़ो लिखो संघर्ष करो,
फिर नया अंदाज मिले।
संगठन के बल से ही,
सदा नया आगाज मिले।
छोड़ ढोंग पाखंडों को,
उठा भीम के झंडों को,
मन में जोश भरोगे तो,
मनुवाद का ताज हिले।
शासक बनना है देश का,
अशिक्षा है मूल क्लेश का,
शिक्षित होकर विद्वान बनो,
फिर नए अल्फाज मिले।
जाति भेद का नाश करो,
आपस में इकलास करो,
भीमराव की सीख से ही,
स्वशासन के राज मिले।
