STORYMIRROR

गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Inspirational

4  

गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Inspirational

भारत के वीर

भारत के वीर

1 min
423

सरहद पर हैं खड़े भारत के वीर हैं,

पाक्षिक हैं शांति अमन के कोदंड के तीर हैं।


शीश कटाना सहज स्वभाव है जिनका,

रक्त पिपासु नग्न कोई शमशीर हैं।


माॅं भारती के भाल पर शोभित,

शहीदों के कफन पर झरते प्रेम नीर हैं।


हम सोएं सुख चैन से यहॉं,

भूख प्यास से तड़पते हुए राहगीर हैं।


बिना धर्म ज्ञान के धर्मांधता फैली,

आतंकी हैं हमसे ही हालत जरा गंभीर हैं।


शोक भाव से युद्ध जीती नहीं जाती,

पाॅंव को घायल करते जकड़े हुए जंजीर हैं।


हम बैठे हैं घरों में मौत का भय कहॉं,

वो जून की रोटीश तरसे आज हुए फकीर हैं।


जीवन है कलकल बहती सरिता,

देश है यमुना तो सैनिक गंगा के तीर हैं।


सरहद पर हैं खड़े भारत के वीर हैं,

पाक्षिक हैं शांति अमन के कोदंड के तीर हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational