भारत भूमि
भारत भूमि
नाज़ है मुझे भारत की भूमि पर, जहां पर मैंने जन्म लिया
जब जब गुज़री सरहद से, हर शहीद को मैंने नमन किया।
राम कृष्ण की जन्म भूमि, कई संत महात्मा हुए यहां पर
देश की खातिर कुर्बान होने वाला हर बहादुर वीर यहां पर।
गीता, कुरान, ग्रंथ साहब के उपदेशों की धरती है
ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि और कौशल की यह धरती है।
समभाव, सदभावना की विचारधारा यहां पलती है।
सत्य, अहिंसा, परोपकार की ज्योति हमेशा जलती है।
स्नेह, समर्पण की भावना से, ओत-प्रोत इसका ज़र्रा ज़र्रा
सौरभ फैलाती पावन वसुंधरा के कण कण में है प्यार भरा।
सर्दी गर्मी, हर मौसम हर हाल में हर सैनिक में जान है
गुलामी की ज़ंजीरों को तोड़ता, हर देशवासी महान है,
गौरवशाली गीत संगीत, कला संस्कृति इस धरा का अभिमान है
स्वतंत्र भारत का लहराता तिरंगा इसकी आन,बान और शान है।
