बेवफा इश्क़
बेवफा इश्क़
इश्क में उनके इतने मशरूम हो गये,
कि वो हमसे हम उनसे दूर हो गये,
हलात उनके कुछ इस तरह हुऐ,
कि वो हमसे हम उनसे खफा हो गये,
और इस नराज़गी मे न जाने कब,
वो हमसे बेवफा हो गये एक बार कह दिया,
होता कि बस करो जुल्म ज़ालीम
हम इश्क का इम्तेहान और न लेते हम,
हो गये बेवफा एक बार कह दिया,
हम इश्क के इस दौर मे केवल वफा माँगी थी
रहे सलामत मेरा इश्क ये दुआ माँगी थी,
क्या मालूम था कुछ पल का साथ,
निभाओगे तुम हमें यूँ बीच राह में,
अकेला छोड़कर जायेंगे तुम,
अनजाने में भी जो सोचने से डरती रही,
अब उस डर से रोज़ घुट - घुट कर मरती हूँ,
दिल से आह निकलकर आसूंओ से बह जाती है,
जब याद तुम्हारी आती है
इतने बेरूखे निकलोगे, ये उम्मीद न थी
वरना हम तो खामखाँ समझ बैठे थे
कि दिवाना हमारी परवाह करता।

