प्रलय का खंजर
प्रलय का खंजर
1 min
261
यह कैसा प्रलय का मंजर है
कहीं महामारी से तो कहीं चुभा इंद्र का खंजर है
ना जाने यह कैसी भगवान की लीला है
आसमान नीला और इंसान डर से पिला है
मानो संसार का अंत समीप आ गया है
लगता है ईश्वर भी मानव से तंग गया है
हे ईश्वर हमें क्यों इतना सता रहा है
एक शस्त्र छोड़ दूसरा शस्त्र चला रहा है
महामारी से तो उभरे नहीं
फिर क्यों चक्रवात का चक्रव्यूह चला रहा है
