बचपन का वो ज़माना
बचपन का वो ज़माना
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बचपन भी क्या ज़माना था,
न खाने की चिंता और न ही कमाना था,
बचपन तो खुशियों का खजाना था,
न जाने क्यों बड़े हो गए
इससे अच्छा वो बचपन का ही ज़माना था
चिड़िया उड़ तोता उड़,
इन्हीं में कहीं बचपन भी उड़ गया,
कागज की उस कश्ती का साथ
भी न जाने कब साथ छूट गया,
वो दो रूपए में खुशियों का न ठिकाना था
सुबह शाम खेलना और न कमाना था
बचपन भी क्या ज़माना था।
