STORYMIRROR

Pawanesh Thakurathi

Abstract

2  

Pawanesh Thakurathi

Abstract

बेटियाँ

बेटियाँ

1 min
173

बेटियाँ तरूड़ की बेल हैं

जो उग आती हैं

पत्थरों के बीच से भी। 


बेटियाँ नागफनी की झाड़ियाँ हैं

जो मुस्कुराती हैं

मरूस्थल की आंधियों में भी। 


बेटियाँ हजारी की फूल हैं

जो खिली रहती हैं

हर घर के आंगन में। 


परंतु आज के समय में बेटियाँ

दो रूपये वाली पेन हैं

जो इस्तेमाल करने के बाद

फेंक दी जाती हैं।। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract