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महेश जैन 'ज्योति'

Inspirational

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महेश जैन 'ज्योति'

Inspirational

बेटियां

बेटियां

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खेलतीं, जूझतीं, जीततीं बेटियाँ। 

भारती की करें आरती बेटियाँ ।।

भाल ऊंचा किया देश का विश्व में । 

जीतने को पदक खेलती बेटियाँ ।। 

पंख फैला उड़ें चीरतीं हैं गगन । 

वर्दियों में सजी घूमतीं बेटियाँ ।।

दो कुलों की बढ़ाती सदा शान ये । 

आन को बान को सींचती बेटियाँ ।।

० 

ये सुहानी हवा सी चलें जब कभी । 

स्वर्ग के द्वार से खोलती बेटियाँ।।

 हैं‌ सृजनहार ये पालती-पोसतीं । 

चल रहीं नेह रँग बांटती बेटियाँ ।।

 ०

सह रही हैं मगर आज अपमान भी । 

कोख में साँस को तोड़ती बेटियाँ ।



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