Hardik Mahajan Hardik
Tragedy
दर्द अपने सारे छुपाती हैं बेटियां
कभी नहीं किसी को बताती हैं बेटियाँ।
इस जाते हुए न...
उस मोड़ पर
जीवन में
न हारे थे, न ...
कुछ जज़्बातों...
हर घर सजाता
दिवाली की रोश...
जगमगाओं रोशनी...
चंद-चंद करके
सरल,सहज, शुद्...
मानवता क्यों आज थमी है, नयनों में भी भरी नमीं है। मानवता क्यों आज थमी है, नयनों में भी भरी नमीं है।
बचपन का मेरा शहर कहीं सो गया अज़नबी सा होकर मानो कहीं खो गया। बचपन का मेरा शहर कहीं सो गया अज़नबी सा होकर मानो कहीं खो गया।
पीड़िता को सम्मान से जीने का हक़ दिलवाओ। पीड़िता को सम्मान से जीने का हक़ दिलवाओ।
दूसरों की बात छोड़ो खुद ही के भी हत्यारे वो। दूसरों की बात छोड़ो खुद ही के भी हत्यारे वो।
फिज़ा में भी अब कुछ रवानी सी छाई उस हैवान की हंसी फिर निकल आई। फिज़ा में भी अब कुछ रवानी सी छाई उस हैवान की हंसी फिर निकल आई।
और तुम्हें इस का अहसास भी नहीं हुआ कभी। और तुम्हें इस का अहसास भी नहीं हुआ कभी।
महंगाई में पसीना बहाई पति की कमाई बटुए में समाई। महंगाई में पसीना बहाई पति की कमाई बटुए में समाई।
कोई छू नहीं सकता था सारे जहाँ की दौलत मानो समाई हो उसमें। कोई छू नहीं सकता था सारे जहाँ की दौलत मानो समाई हो उसमें।
सच में जीवन बहुत बदल गया है सुकून ना जाने कहा खो गया है। सच में जीवन बहुत बदल गया है सुकून ना जाने कहा खो गया है।
उन हत्यारों से क्या निर्बलों की यही है एक नियति यथार्थ में ! उन हत्यारों से क्या निर्बलों की यही है एक नियति यथार्थ में !
सिर्फ शरीर की हत्या करने वाले हत्यारे नहीं कहलाते। सिर्फ शरीर की हत्या करने वाले हत्यारे नहीं कहलाते।
चादर लाए या मच्छरदानी, एक वही मेरे पति का बटुआ, चादर लाए या मच्छरदानी, एक वही मेरे पति का बटुआ,
प्लास्टिक सी मुस्कान चेहरे पर चिपकाते हैं क्योंकि दुनिया दिल पर हावी है ! प्लास्टिक सी मुस्कान चेहरे पर चिपकाते हैं क्योंकि दुनिया दिल पर हावी है !
नन्ही कलियों की हत्या कर खुले घूम रहे हैं हत्यारे। नन्ही कलियों की हत्या कर खुले घूम रहे हैं हत्यारे।
ऐसों को तो इनाम में मिलना चाहिए केवल केवल फांसी का फंदा ! ऐसों को तो इनाम में मिलना चाहिए केवल केवल फांसी का फंदा !
पहले तो माँ के हाथों ही जर्सी सिलवाई जाती थी। पहले तो माँ के हाथों ही जर्सी सिलवाई जाती थी।
सोचो वह व्यथित होकर कितना रोते होंगे जब कहीं अन्न के दाने बिखरे देखते होंगे। सोचो वह व्यथित होकर कितना रोते होंगे जब कहीं अन्न के दाने बिखरे देखते ह...
क्यों खेल रहे हैं ये हत्यारे, क्यों हत्यारे बने जा रहें हैं ? क्यों खेल रहे हैं ये हत्यारे, क्यों हत्यारे बने जा रहें हैं ?
कब आजाद होंगे भय के पिंजरे में घुट रहा है दम। कब आजाद होंगे भय के पिंजरे में घुट रहा है दम।
गर हो गंगा सा पावन तभी प्यार है, प्यार निश्छल है, हर धर्म का सार है। गर हो गंगा सा पावन तभी प्यार है, प्यार निश्छल है, हर धर्म का सार है।