बेटी की विदाई
बेटी की विदाई
लाख भीगें माँ का आँचल
लाख बेटी की आंख गीली हो।
कितना भी रोये माँ बेटी
फिर भी बेटी की विदाई हो।
चाहें सुबह सुबह की हो तन्हाई
या शाम उदासी से पीली हो।
फिर भी बेटी ही क्यूँ पराई
हर माँ का एक ही सपना हो।
वक्त के साथ हो हाथ पीले
किस माँ के सीने में दर्द नहीं है।
फिर भी दस्तूर समझ निभाती
निष्ठुर बन करती विदाई।
मेरे ही आँगन की तुलसी
प्रफुल्लित कर देना उसका आँगन।
