STORYMIRROR

रंजना उपाध्याय

Abstract

4  

रंजना उपाध्याय

Abstract

बेटी की विदाई

बेटी की विदाई

1 min
279

लाख भीगें माँ का आँचल

लाख बेटी की आंख गीली हो।


कितना भी रोये माँ बेटी

फिर भी बेटी की विदाई हो।


चाहें सुबह सुबह की हो तन्हाई

या शाम उदासी से पीली हो।


फिर भी बेटी ही क्यूँ पराई

हर माँ का एक ही सपना हो।


वक्त के साथ हो हाथ पीले

किस माँ के सीने में दर्द नहीं है।


फिर भी दस्तूर समझ निभाती 

निष्ठुर बन करती विदाई।


मेरे ही आँगन की तुलसी

प्रफुल्लित कर देना उसका आँगन।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract