STORYMIRROR

Nalanda Satish

Abstract Tragedy

3  

Nalanda Satish

Abstract Tragedy

बेमिसाल

बेमिसाल

1 min
211

अन्देशा बुरी खबर का देती हैं अक्सर गहरी नींद

करवटें बदलते रहो रात भर, फिर भी अच्छा कुछ नहीं होता


सन्देशा मौत की ख़बर का देती हैं जिंदगी थक हारकर

जीते रहो बेमतलब, फिर भी जीने का हुनर नहीं होता


बन्दिशें तालीम देती हैं अक्सर बेईमानी की

अहंकार में डूबे रहते हैं आकंठ, फिर भी लालच का ईमान नहीं सोता


बेशर्मी की हद ने बरबाद कर दिया लफ्जों का नूर

अब बात कहो सच्ची फिर भी लोगों को विश्वास नहीं होता


बदनीयती से मशहूर हुए वह 'नालन्दा' जो काबिल न थे

बेमिसाल हो बुलंदी फिर भी जीतनेवाला हमेशा दौड़ में शामिल नहीं होता



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract