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NAMAN KAPOOR

Romance Classics

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NAMAN KAPOOR

Romance Classics

बेख्याली का फितूर

बेख्याली का फितूर

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ऐसा है तेरा नूर,

देखके जिसे चाँदनी का टूटा गुरूर,

साँसें जो तूने चुराई,

जीने की वजह फिर एक बार जगाई,


आती याद हैं वो यादें,

जब देखकर तूझे थम गईं थी साँसें,

बेख्याली पर किया तूने राज,

तूझे पाने के फितूर का पहना मैने ताज,


थी कईं मुश्किलें,

थी कईं अड़चन,

एक होने का हमने लिया वचन,

तूझमे ही अपने आप को खो दिया,

तूझे पाने की खूशी में ये दिल रो दिया।


खुशनुमा सा होगा वो पल,

जब एक हो जाएँगें हम दोनो कल,

तू जाने-जिगर, तू जाने-बाहार,

मैं तेरा कर रहा हूँ बेसबरी से इंतज़ार,

तेरे बिन जीना न मुझको जमेगा,

ये बेख्याली का फितूर कभी नहीं थमेगा।


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