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Sandeep Suman

Classics Inspirational Others

4.5  

Sandeep Suman

Classics Inspirational Others

बेबसी

बेबसी

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59

उम्मीदों के साए में, हमने धोखे हजार खाए,
वक़्त ने दिए जो तोहफे, वो अश्कों में बदल आए।
इंसान के जज्बातों को, हालात दबा देते हैं,
हम हंसना चाहें भी तो, ग़म चेहरा मिटा देते हैं।
दुनिया को संवारने में, मैं इतना खोया रहा,
गैरों के आशियाने में, दिन-रात जागता रहा।
दूसरों के बच्चों का तो, हर फर्ज निभाया मैंने,
पर अपने ही बच्चों का, बचपन गंवाया मैंने।
उनकी मासूम आंखों में, अब देख नहीं पाता हूं,
नजरें चुराकर खुद से, अंदर ही अंदर रोता हूं।
ध्यान ना दे पाया उनपर, जब उनको जरूरत थी,
मेरी हर कोशिश शायद, हालात से मजबूर थी।
परिस्थितियां आज मेरी, बिल्कुल ही बदल गई हैं,
जो खुशियां बची थीं दिल में, वो धूप में पिघल गई हैं।
पर दिल से एक ही दुआ, अब हर पल निकल रही है,
काश लौट आए वो बचपन, जिसकी याद तड़प रही है।
बिखरे हुए इन हालातों में, अब बस एक ही आस बाकी है,
'सुमन' की महक से महके आँगन, बस यही प्यास बाकी है।

    - संदीप कुमार सुमन 


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