सुमन की सुगंध और प्रेम का संगम
सुमन की सुगंध और प्रेम का संगम
मोह का जााल है यह गहरा,
इस पर लगा धड़कनों का पहरा।
तुम बने इस संगम के मीत,
हवाओं ने गाया मिलन का गीत।शब्दों में पिरोया है यह अहसास,
तुम दूर होकर भी हो दिल के पास।
चला है जो भावनाओं का तीर,
बदल रहा है चाहत की तकदीर।खिलते हैं जैसे उपवन में सुमन,
वैसे ही महक उठता है यह मन।
यह प्रेम का पावन नाता है,
जो रूह को रूह से मिलाता है।
