सुर-सुमन की धुन
सुर-सुमन की धुन
अच्छे सुंदर से सुरों को साज़ बनाता हूँ
,गठीले सुरों को बांह का अंदाज़ बनाता हूँ।
बहती हुई हवाओं से सुर उधार लेता हूँ,
धड़कते हुए दिलों को मैं मिक़दार देता हूँ।
दर्द को भी मीठे गीतों में ढाल देता हूँ,
उलझे हुए ख्यालों को सुरों में पाल देता हूँ।
ये धुनें ही मेरी तन्हाई की साथी हैं,
संगीत से सजी हर रात बहुत बाकी है।
सांसों की इस लय को नया मोड़ देता हूँ,
मैं हर टूटे हुए दिल को सुरों से जोड़ देता हूँ।
मैं अपनी धुन का राही हूँ, बस चलता जाता हूँ,
सुरों के इस समंदर में, मैं बहता जाता हूँ।
सुरों के हर चमन में, गूँजता मेरा नाम है।
मैं अपने ही तराने से, नया आगाज़ देता हूँ।
