बदलाव
बदलाव
चलो इस राखी को कुछ अलग तरह से मनाये,
बहन ही भाई को राखी क्यों बांधे
हम भाइयों से भी बहन को राखी बंधवायें।
साथ देने को एक दूसरे का दोनों से वादा दिलाये,
आओ चलो एक दुनिया बराबरी वाली बनायें।
नहीं पीछे है अब लड़की कभी कहीं भी
तो क्यों सिर्फ भाई के कांधों
बहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठवायें।
वैसे भी कोई बहन कहां भाई को प्यार देने में पीछे होती
जो हो जाये भाई को जरा भी कुछ न जाने कितने
धागे बांध ईश्वर से मन्नत मांग लेती।
पहुंच जाती है एक आवाज में
भाई के खिलाफ एक शब्द नहीं सुनती है।
तो क्यों न उनकी चिन्ता उनकी फिक्र को भी
एक आयाम दे जाये,
चलो इस राखी को कुछ अलग तरह से मनाये
हम भाइयों से भी बहन को राखी बंधवायें ।
