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Dayasagar Dharua

Abstract

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Dayasagar Dharua

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बड़ी दिक्कत थी भाई

बड़ी दिक्कत थी भाई

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पहले कोई चिट्ठी भेजता

तो वो चिट्ठी अरसों बाद पहुँचता

जैसे शादी की चिट्ठी तलाक के दिन

जन्मदिन कि खुशी मातम के दिन


बड़ी दिक्कत थी भाई - चिट्ठी आना


अब तो काफी आसान हो गया

वाह वाह, क्या जमाना आ गया !


पहले किसी के प्रेम मे गर पड़ जाओ

तो रोज किसी मध्यस्थ के पाँव पड़ते जाओ

जैसे कुछ कहना हो या सुनना हो

या गलतफहमी जिसे सुधारना हो


बड़ी दिक्कत थी भाइ - प्रेम करना


अब तो काफी आसान हो गया

वाह वाह, क्या जमाना आ गया !


पहले दूरी मजबूरी थी जो आज नहीं

झूठ फैला हर तरफ और सच्चाई कहीं कहीं

जैसे घर पे सोये कहते 'ऑफिस के केबिन में हूँ'

लेट्रीन में हगते कहते 'मन्दिर के आरती में हूँ'


बड़ी दिक्कत थी भाई - झूठ बोलना


अब तो काफी आसान हो गया

वाह वाह, क्या जमाना आ गया !


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