STORYMIRROR

रागिनी सिंह

Inspirational

2  

रागिनी सिंह

Inspirational

बचपन

बचपन

1 min
237

बैठे हैं आज अहम के चश्में सम्हाल कर

मासूमियत स्कूल के बेंच पर रह गई।


अब भी तलाशता हूँ, वो अनसुनी सी बात,

चुपके से कानों में, क्या दोस्त कह गयी।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational