बचपन का प्यार
बचपन का प्यार
फूलों के महकते लरजते गांव में
पेड़ों की ममता सी घनेरी छांव में
बहती नदिया की धार में
हम चलायें किश्ती और
डूब जायें इसके
प्यार में
खेल खेल में
प्यार हो गया
आंखों आंखों में
इजहार हो गया
बचपन का था यह प्यार
कब यौवन की कगार पर
पहुंचकर
इश्क की हदों के पार हो गया
यह बचपन की दोस्ती
बचपन के रिश्ते
बचपन का प्यार
कोई अलग ही प्यार की
दास्तान कहते हैं
प्यार होता है
इतना बुलंद
रिश्ते होते हैं
इतने गहरे कि
आसमान के सिर
सजदे में
झुकते हैं और
सागर के दिल इनके
लबों को चूमने के लिए
बल्लियों बल्लियों उछलते हैं।

