STORYMIRROR

Nalanda Satish

Abstract Tragedy

3  

Nalanda Satish

Abstract Tragedy

बागी

बागी

1 min
460

दुआओं को जो आसमान से हैं बरसाना  

तो उम्मीदों को कभी चोटिल मत होने देना


प्रेम है परमात्मा का जो अनुराग से हैं मिलता 

पर जख्मी दिल को कभी बागी मत होने देना


मौन की बानगी आनंद में थिरकने से है मिलती 

किंतु चित्त को कभी उदास मत होने देना


दीवारों ने सुन ली सारी तल्खियाँ जिगर की

लेकिन आँसुओं को आँखों में घर मत करने देना


जश्न बन न सको किसी की जिंदगी का ,कोई बात नहीं

पर किसी की हयात का अँधेरा खुद को, मत बनने देना


बिखरी पड़ी है जन्नत हर शै पर 'नालन्दा'

इसे गलती से भी जहन्नुम मत बनने देना



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract