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Anita Koiri

Abstract

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Anita Koiri

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अविनाशी राम

अविनाशी राम

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जो मेरे राम हैं

क्या वें तेरे राम नहीं ?

क्या कोई अंतर है

तेरे और मेरे राम में ?


मेरे राम श्यामल सौम्य शांत है

मेरे राम प्रेम के सागर है

मेरे राम ज्ञान भंडार है

मेरे राम सबरी और मंथरा दोनों के है


मेरे राम सीता के प्रेमी और प्रेरणास्रोत हैं

राम सर्वव्यापी अनंत हैं

मेरे राम ने राज सिंहासन त्यागें

क्या वो कभी मंदिर का मोह करेंगे?

राम तो संसार के कण - कण में है

राम उस भिखारी के लिए रोटी में है

राम उस बच्चे के लिए शिक्षा में है

राम उस किसान के लिए अनाज में है

राम उस बेरोजगार के लिए रोजगार में है


राम उस न्यायप्राथी के लिए सच्चा न्याय हैं

राजमहल का वासी

वह अनंत अविनाशी

बन जाता है लोककल्याण में,

देखो वन का वासी

मेरे राम अनंत अविनाशी !


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