औरत
औरत
प्यार की मूरत होती है
औरत भोली सी सूरत होती है औरत,
क़द्र इसकी क्यों करते नहीं
यह दुनिया वाले
हर पल क्यों इसको
बदनाम करते हैं दुनिया वाले,
क्यों भूल जाते हैं कि
यह है जननी इनकी,
ग़ोद में इनकी है
इनका बचपन बीता
हाथों में इनकी है
बंधी राखी इनकी,
जो उम्र भर बन कर चले
जीवन संगिनी
जो बेटी बनकर इनकी
ग़ोद में है खेलती,
उसको अगर न तुम मान दोगे तो
कहाँ से तुम सम्मान पाओगे,
थोड़ी सी इज़्ज़त से जो देखोगे इनको तो
खुद की नज़रो में न गिरोगे,
थोड़ी सी सोच तुम
बदल कर तो देखो अपनी
इनकी झोली में जो खुशियां भरोगे
तो खुद भी सुकून से तुम सो सकोगे
इनको अगर इज़्ज़त दोगे तो
अपने लिए भी
इज़्ज़त कमाओगे।
