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Ruchika Rai

Abstract

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Ruchika Rai

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अतीत के पन्ने

अतीत के पन्ने

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अतीत के पन्ने को पलटकर देखा कई बार,

दर्द दिख रहा था उसमें यारों मुझे बेशुमार,

कसक मन में बढ़ उठती याद कर उसे,

जिंदगी की जद्दोजहद से हारना नही स्वीकार।


अतीत के पन्नों से प्रेरणा ले जीवन पथ पर चली,

हार जीत से आगे बढ़ जिंदगी के रण को लड़ी,

किया स्वीकार हर मुसीबतों को हिम्मत संग,

मुसीबतें मेरे हौसलों से आकर कई बार भिड़ी।


अतीत में थी कुछ मीठी सुनहरी प्यारी यादें,

लाती थी होठों पर स्निग्ध मुस्कान और बातें,

जिंदगी को प्रेम करना सीखलाती हैं मुझे,

दर्द और मुस्कान के बीच बनाती थी राहें।


चलो अतीत के पन्नों को न फिर हम पलटे,

आगे नई कहानी लिखे जो हो जरा हटके,

प्रेम और विश्वास की एक मजबूत इमारत बनाये,

जो कभी किसी भी बाहरी चोट से न चटके।


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