Deepak Kumar jha
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"मैं जानता हूँ, मैं अर्जुन नहीं, मेरे रथ का सारथी माधव नहीं।मगर हर किस्सा याद रखा जाएगा, मेरे साथ हुए हर छल का उत्तर दिया जाएगा।"
अर्जुन नहीं
नहीं
छंद:
इंसान को डसने...
तुझे जी भर जि...
सेना का दुरुप...
चंदा मामा कवि...
मेरे कृष्णा
प्रेम ने मृत्...
मौत कितनी हसी...
अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।। अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।।
तुम्हें ये सब बदलना है अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर सबके लिए। तुम्हें ये सब बदलना है अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर सबके लिए।
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन बन पायेंगे। आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन...
मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर
दाने दाने को मर रहा आपका परिवार है। ये कैसे कश लगाते हो? दाने दाने को मर रहा आपका परिवार है। ये कैसे कश लगाते हो?
बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ। बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ।
कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ। कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ।
सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों का मतलब और मकसद ही ... सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों...
सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश
जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे अछूत ही जब मैं समाज में बैठूँ तो बगल वाला पास से उठ जाता है। मंदिर में मेरा जाना जैसे...
कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं। कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं।
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में। रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में।
अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।। अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।।
जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे
आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया
हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे। हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे।
देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खोता है देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खो...