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Dr. Riya Patel

Drama


4.0  

Dr. Riya Patel

Drama


अपूर्ण

अपूर्ण

1 min 363 1 min 363

शोरगुल बहुत था,

कम करनेकी ही इच्छा थी,

अचानक सब बंद हो गया,

अब तो शुरू करने का ही प्रयास है।


भगदड़ बड़ी लगी रहती थी,

अवकाश की बड़ी मनोकामना थी,

अब बस अवकाश ही अवकाश है,

तब समझा भगदड़ में ही जीवन है।


आशाएं एवम् इच्छाएं बहुत थी,

पूरी न होने की शिकायतें भी लगी रहती थी,

अब सब पूर्ण हो चुकी है,

तो समझे है कि अपुर्णता से ही

ज़िन्दगी की खुमारी है।


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