अपनों से उम्मीद
अपनों से उम्मीद
अपनों से की गई उम्मीद
उड़ा देती है, हमारी नींद
नहीं जीते है, नहीं मरते है,
अपनों से बे उम्मीद मरते है
अपनों से की गई कोई इच्छा,
हृदय को देती गम का गुच्छा
किसी रिश्ते से की गई उम्मीद
हृदय को देती शूलों की जींद
पत्थर भले ही साथ दे देते है
पर अपने सदा ही दगा देते है
अपनों पर किया गया भरोसा,
शीशे को देता पत्थर का धोखा
अपनों से नाउम्मीदी ही अच्छी,
खुद के भरोसे की तो रहती ख़ुशी
हमारी हमसे की गई उम्मीद,
ख्वाबों को बनाती उन्मुक्त परिंद
