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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Inspirational

"अपना हिंदी नववर्ष"

"अपना हिंदी नववर्ष"

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आ गया देखो, अपना हिंदी नववर्ष

देखो प्रकृति में है, छाया अपार हर्ष

मौसम भी हुआ, शनै-शनै गर्म-शुष्क

कट रही, फसलें कृषक भी है, संतुष्ट

चैत्र नवरात्र भी शुरू हो गये, सहर्ष

मातारानी भक्ति करो, सब आदर्श

जीवन का मिट जायेगा, हर सँघर्ष

जो लगातार चलने का निभाता, फर्ज

उसे एकदिन मिलता, मंजिल उत्कर्ष

प्रकृति में भी बदलाव होता है, दर्ज

अंग्रेजी से 57 वर्ष आगे यह नववर्ष

कहते, हम सब इसको विक्रम संवत

आज झूलेलालजी का हुआ, अवतरण

उन्होंने अधर्म का नाश किया था, तुरंत

जो सूर्य की तरह करता है, नित कर्म

उसके लिये तो हर दिन ही है, नववर्ष

आलसियों के लिए, क्या अब, क्या, कल

उन्हें सदा देता वर्तमान एक नया, कर्ज

इस नववर्ष, तम मिटाए, कर्मदीप जलाए

स्वप्न को पूरा करने, करें पूरी शक्ति, खर्च



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