STORYMIRROR

Shubham Amar Pandey

Inspirational

4  

Shubham Amar Pandey

Inspirational

अंतर्मन से अंतर्द्वंद्व

अंतर्मन से अंतर्द्वंद्व

1 min
373

टूटना ना हारना ना 

और कभी रोना ना

पल जो है दो पल का है 

ज़िन्दगी तू खोना ना


रास्तों के शोर है ये 

एक दिन थम जाएंगे

बिन बुलाए ही कभी

बादल बरसने आएंगे


जब अंधेरों की कोई

दीवार तुमको रोकेगी

रोशनी अंतस में भर लो

जुगनू बन के तोड़ेगी


ज़िन्दगी कुछ बर्फ सी

मायूस तुझको जब लगे

मुस्कुरा और आगे बढ़

हिम से ही सदा पानी बहे


जब कभी लहरों के भय से

गति तेरी अवरुद्ध हो

चाल को ही ढाल कर ले

ज़िन्दगी भयमुक्त हो


जब कभी सावन सुहाना

यूं लगे पतझड़ हुआ है

तो समझ लेना कि जीवन ने

नव चेतना का उद्भव छुआ है


जब कभी जीवन से भी 

मन विरक्त होने लगे

मृत्यु के आधीन जब 

मन के सब कोने लगे


जब तुम्हे संसार रूपी नाव

जर्जर दिख रही हो

जब तुम्हे मछली ही जल में 

डूबती सी लग रही हो


जब भ्रमर ही फूल के

अंत का कारण बने

दुष्ट, दंभी और लोभी

मानवता के तारण बने


तब सजग हो ,शांत हो

धैर्य धारण कर सुनो

गीता, मानस , गुरुवाणी को

मुक्ति का मारग चुनो


छोड़कर सब काम तुम

निष्काम पथ पर अब चलो

है समय उत्तम यही अब

जीवन और मृत्यु से आगे बढ़ो


स्वार्थ पथ को त्याग कर

मनुष्यता का पालन करो

देह से बाहर निकल कर

अपने - अपने राम से मिलो।।


  


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational