अन्तरिक्ष से जुड़ा मानव
अन्तरिक्ष से जुड़ा मानव
शरीर हमारा है एक विचित्र अजायब घर
संतों ने दी शरीर के रहस्य की जानकारी,
कबीरदास ने बताई इंगला पिंगला सुषुम्ना नाड़ी
बिना किसी प्रयोग शाला के व्याख्या की।
शरीर में अनवरत विद्युत् प्रवाह हो रहा
तभी सत्संग की महिमा गाई गई,
संग करें उच्च आचरण के लोगों का
तभी रह सकते हैं पूर्ण स्वस्थ।
आइन्स्टाइन कहते हैं जो पदार्थ देखते हैं
वह पदार्थ पदार्थ नहीं तरंग है,
हमारे मस्तिष्क में अरबों सेल्स हैं
उन पर अनवरत न्यूरॉन की वर्षा होती रहती ।
क्वाण्टम किरण प्रकाश की गति से चलती
हमारा मस्तिष्क अंतरिक्ष से जुड़ा रहता,
मस्तिष्क पर जब न्यूरॉन वर्षा होती,
उससे माइग्रेन ऊर्जा बनती ।
पूरा ब्रह्मांड परमात्मा शक्ति से है भरा
हम लेते शरीर के लिए उतनी ही ऊर्जा,
जितनी हम शक्ति से पचा सकते
हम अंतरिक्ष से सीधे ऊर्जा ग्रहण करते ।
जीव कहाँ से आता है कहाँ चला जाता है
कोई नहीं जानता यह रहस्य,
ये अंतरिक्ष ये तारे ये ग्रह और जीव
सभी परमात्मा के प्रकाश हैं।
अगर कोई व्यक्ति एक फूल तोड़ता है
तो उसके कंपन से अंतरिक्ष प्रभावित होता है,
अंतरिक्ष से ऊपर कोई परम सत्ता है
जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड को चला रही है।
