STORYMIRROR

Neer N

Abstract

3  

Neer N

Abstract

अन्तर्द्वन्द्व

अन्तर्द्वन्द्व

1 min
212

कोई किसी को नहीं बताता

अपने अंदर का द्वंद्व,


कोई किसी पर ज़ाहिर नहीं करता,

सब हंसते हैं, मुस्काते हैं


अपने आप को खुद ही बहलाते हैं

कोई किसी पर ज़ाहिर नहीं करता।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract