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Ruchika Rai

Abstract

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Ruchika Rai

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अंतिम पायदान

अंतिम पायदान

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वर्ष के अंतिम पायदान पर हम खड़े हैं,

अपनी किस्मत से जंग हम स्वयं लड़े हैं।


कितनी चोटें खाई, कितनी दरारें आईं,

अपने हौसलों से दरारों को हमने भरे हैं।


टूटता विश्वास रिश्तों से उलझे किश्तों में,

पर फिर भी मुश्किलों पर हम भारी पड़े हैं।


नाउम्मीदी का घना अँधेरा नहीं दिखे सवेरा,

जुगनू बनकर हम घने अँधेरों में भी बरे हैं।


हारना स्वीकार नहीं ,जिंदगी से रार नहीं,

जिंदगी को सरल बनाने के लिए हम अड़े हैं।


नव वर्ष हो नयी कल्पनाओं से पल्लवित,

कल्पनाओं को पूरा करने से नहीं हम डरे हैं।


बीतते वर्ष का शुक्रिया आते वर्ष का स्वागत,

हम आस का दीपक जला कर सदा खड़े हैं।


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