अनमोल खजाना
अनमोल खजाना
नोट भरे हैं और बहुत कुछ
तब जाके कुछ बात बनी है
हाथ लगा ना पाए कोई
बटुआ है या नाग मणी है
प्यार से कभी-कभी सहलाऊं
मीठी बातों से दिल बहलाऊं
बाहर आएं इक-दो नोट
कर लूं मैं कुछ खरीद फरोत
यही तो इसकी आदत खास
आसानी से नहीं बनती बात
चुपके से मैं नज़र घुमाकर
पूरा सच जानूंगी
लगाती हूं तरकीब कोई
जल्दी हार नहीं मानूंगी
पाजेबें भी टूट गई अब
चैन कहां अब दिन और रैन
टूटी जुत्ती साड़ी फट गई
टूट गई है गले की चेन
दो आंसू भी बाहर आए
पीले पड़े गुलाबी होंठ
स्वामी जी का दिल पसीजा
बाहर आए सारे नोट।
