STORYMIRROR

Manu Sweta

Abstract

2  

Manu Sweta

Abstract

अनकहे रिश्ते

अनकहे रिश्ते

1 min
160

कुछ रिश्ते खुद बन जाते

कुछ रिश्ते अपने लगते

न जाने कब हो जाते अपने

हरपल हमको प्यारे लगते

न कोई शर्त रिश्तो में

बस प्यार ही प्यार लुटाते

न कोई साज़िश होती मन में

बस निश्छल निभाते जाते

न कोई दिखावा अपने अहम का

बस दिल की बात सुनाते जाते

कोई सीख नही कोई बंदिश नही

हमको आज़ादी से जीना सीखाते

बस कम ही होते है ऐसे अनकहे रिश्ते

जो खुद से ही खुद से बन जाते।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract