अँधेरा धरा पर न बाकी रहे
अँधेरा धरा पर न बाकी रहे
ऐसा दीपक जले दिल को रौशन करे,
अब अँधेरा धरा पर न बाकी रहे ।।
साँसो की डोर से बंध के आए खुशी,
हर तरफ हर कहीं खिल उठे जिन्दगी ।
अब गमों के शहर में न साथी रहे ........
अब अँधेरा धरा पर न बाकी रहे ..........॥
लेके आँखों में खुशियों के मोती चलो,
देके खुशियाँ जमाने के गम छीन लो ।
अब न बाकी गमों की निशानी रहे......
ऐसा दीपक जले ............॥
ये चकाचौंध पल भर में मिट जायेगी ,
दिल की आहट हमें फिर यूँ तड़पायेगी ।
कुछ करें हम न आंखों में पानी रहे....
ऐसा दीपक जले दिल को रौशन करे...।
अब अंधेरा धरा पर न बाकी रहे ....॥
