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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Inspirational

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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Inspirational

अँधेरा धरा पर न बाकी रहे

अँधेरा धरा पर न बाकी रहे

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ऐसा दीपक जले दिल को रौशन करे,

अब अँधेरा धरा पर न बाकी रहे ।।


साँसो की डोर से बंध के आए खुशी,

हर तरफ हर कहीं खिल उठे जिन्दगी ।

अब गमों के शहर में न साथी रहे ........

अब अँधेरा धरा पर न बाकी रहे ..........॥


लेके आँखों में खुशियों के मोती चलो,

देके खुशियाँ जमाने के गम छीन लो ।

अब न बाकी गमों की निशानी रहे......

ऐसा दीपक जले ............॥


ये चकाचौंध पल भर में मिट जायेगी ,

दिल की आहट हमें फिर यूँ तड़पायेगी ।

कुछ करें हम न आंखों में पानी रहे....

ऐसा दीपक जले दिल को रौशन करे...।

अब अंधेरा धरा पर न बाकी रहे ....॥



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