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Rekha Shukla

Abstract

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Rekha Shukla

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अंध हैं

अंध हैं

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ज़मीन के फ़साने ख़्वाबों पे बंद हैं

ख़यालों का जहाँ, सुपर कूल अंध हैं 

लापता होशों हवास आँखे बंद हैं

नैणो का हैं जहाँ, सूपर कूल अंध हैं ।



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