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Sumit. Malhotra

Abstract Romance

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Sumit. Malhotra

Abstract Romance

अंदाज़ तेरी बे-रूख़ी का।

अंदाज़ तेरी बे-रूख़ी का।

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अंदाज़ तेरी बे-रूख़ी का हैरान परेशान करता, 

अंदाज़ तेरी अदाओं का क़त्ल हमारा है करता। 

अंदाज़-ए-मोहब्बत तेरा पहले ही क़त्ल करता, 

अंदाज़-ए-मोहब्बत तेरा अब तो घायल करता। 


तुम्हे मिलने से पहले तेरे बिन जीना था आसान, 

अब तेरे जाने के बाद लगता जीना ना आसान। 

प्यार करने का तरीका तेरा समझना न आसान, 

धन-दौलत के लिए किया प्यार मेरा भी कुर्बान। 


इश्क़ एक बार वो भी पहली भूलना ना आसान, 

तमाम उम्र याद आती जिसे भूलना ना आसान। 

तौहीन-ए-इश्क़ इल्तिज़ा कभी भी तुम न करना, 

प्यार रब का ही रूप तो सजदा इबादत है करना। 


तमाशा प्यार -मोहब्बत का कभी नहीं है करना, 

प्यार -मोहब्बत सदा वफ़ादारी से हमें है करना। 

ऐसा ज़ख़्म बार-बार मासूम दिल को नहीं देना, 

सच्चा प्यार कर सकते तो हम सबने इसे करना।


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