अलविदा
अलविदा
हालांकि कहानी प्यार के बारे में थी, लेकिन कहानी में प्यार नहीं था।
करीब आने का ख्वाब था, चाहत थी परिवार बसाने की।
उनका प्यार तो बहुत था पर आज भी कहने की हिम्मत नहीं थी।
उस रात उल्लू बुरी तरह रोया।
वहीं से प्रश्न आया कि मैं पवित्र हूं या अशुद्ध।
मैंने भलाई के लिए बहुत सी चीजों का त्याग किया है।
लेकिन ऐसा करने से क्या होगा?
आपने कहा था कि आप वहां होंगे।
मैंने तुमसे कहा था कि हाथ पकड़ लो।
लेकिन आज वे यादों में बंधे हैं।
उनका एक परिवार है, केवल मैं उस परिवार में नहीं हूं।
उसकी आँखों में नींद लाने के लिए हर रात कोई गुनगुनाता है।
मैं ही सुबह के इंतजार में जागता हूं।
सुबह की ओस मुझे शांत रहना सिखाती है,
हाँ, आज मैं शांत हूँ।
क्योंकि मैं किसके लिए बेचैन भटक रहा था,
उसे आज दूसरा पता मिल गया।
वह चिट्ठी भी भेजता है तो उस तक नहीं पहुंचता।
अलविदा, अलविदा और अलविदा।
हर दिन मुस्कान के साथ अलविदा कहना आज हमें अलग कर गया।
मैं यह नहीं कह रहा कि प्यार नहीं था।
बस बांध नहीं सका।
अगर मैं अहंकारी होता तो वह उस अहंकार की भाषा नहीं समझना चाहता था।
जब भाव बरसते तो सिर पर क्रोध की छत्रछाया लिए खड़े हो जाते।
मैंने उसे पुकारा, प्रेम का गीत सुनना चाहता था।
आज भी नहीं सुना गया है।
उन्हें संगीत से प्यार है, फिर भी संगीत सुनते हैं
फर्क सिर्फ इतना है कि प्रेम का गीत किसी और ने अलग धुन में गाया है।
मैंने दूर से देखा कि वह रोज चलती है,
मैंने सोचा कि मैं शाम को बात करूंगा।
नफरत के चैप्टर को प्यार से मिटा दूंगा।
क्या वह जानता है कि आज भी उसके नाम पर भगवान के चरणों में फूल चढ़ाता है?
क्या उसे पता है कि मैं उसकी अधूरी कहानी को पूरा करने की उम्मीद में
एक कलम और एक डायरी लिए इंतज़ार कर रहा हूँ ?
क्या वह जानता है कि वह मुझे पहले दिन की तरह प्रिय है ?
