surender kumar
Romance Fantasy
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं
अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते हैं
इस दिल का दर्द दिखाएँ किसे
मरहम लगाने वाले ही जख्म दे जाते हैं
अकेले
जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना। जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना।
तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में.. तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में..
"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं। "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं।
दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया ! दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया !
अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा। अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा।
तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख दें। तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख ...
बस तुम यूं ही आ जाना...। बस तुम यूं ही आ जाना...।
एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।। एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।।
मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे। मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे।
जबसे साथ तुम्हारा पाया, मन- वीणा के तार बजे। जबसे साथ तुम्हारा पाया, मन- वीणा के तार बजे।
मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था... मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था...
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ जाओ। आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ ज...
खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे ! खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे !
गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर... गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर...
मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास... मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास...
रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना। रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना।
इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन ! इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन !
अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई। अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई।