STORYMIRROR

Vikas Sharma Daksh

Inspirational

2  

Vikas Sharma Daksh

Inspirational

अजनबी हमसफ़र

अजनबी हमसफ़र

1 min
316

चलते हो तो साथ चलो ज़रा हमारे

बदल जायेंगे दिल के इरादे तुम्हारे


दुश्वार रहगुज़र अजनबी हमसफर

मज़िलें मगर खुद करेंगी हमें इशारे


बेशक रहें दोनों के मकसद जुदा

कटता है सफ़र इक-दूजे के सहारे


माना कि हम में है कुछ कमोबेशी

आसमाँ से कहाँ गये फरिश्ते उतारे


इन हौसलों पे ज़रा ऐतबार तो करो  

ख्वाहिशें अपनी खड़ी हैं बाँहे पसारे


कश्ती उम्मीदों की डूबने मत देना

हिम्मत तूफां में ढूंढ लेती है किनारे


‘दक्ष’ जिंदा है इक मिसाल बन कर

जो मारे नहीं मरे हराये नहीं है हारे



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational