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Gangotri Priyadarshini

Abstract Fantasy

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Gangotri Priyadarshini

Abstract Fantasy

अजनबी अपना सा

अजनबी अपना सा

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दिल का हर हाल

तुमसे तो कभी न छुपा था

जो खुशियां सुकून मेरे पास है

सब तो तुमसे नसीब हुए थे ।।


न तुम मेरे अपने ही 

ना जाना पहचाना

दिल में मेरे समा गए हो

ए हमदर्द अनजाना ।।


अजनबी हो कर भी 

पूरी करे वो हर एक सपना

जी करता है पल पल

हर पल यादों में तुम्हारे

बीती जाए मेरी रैना ।।


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